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अक्षय तृतीया पर विशेष: शुभता, समृद्धि और ज्योतिषीय महत्व का अनोखा संगम

सर्वसिद्धि मुहूर्त में किए गए कार्य देते हैं अक्षय फल, जानें इसका गहरा अर्थ

डिजिटल डेस्क। हिंदू धर्म में Akshaya Tritiya (आखा तीज) को अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व माना जाता है। हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार बिना किसी विशेष मुहूर्त के ही शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य, दान और निवेश का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए इसे “अक्षय” कहा जाता है।

क्या है अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन Lord Vishnu के छठे अवतार Parashurama का जन्म हुआ था। साथ ही, यह दिन Mahabharata काल में पांडवों को अक्षय पात्र प्राप्त होने से भी जुड़ा है, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई।

ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों है खास?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी-अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं—

सूर्य Aries (मेष) में
चंद्रमा Taurus (वृषभ) में

यह स्थिति अत्यंत शुभ मानी जाती है क्योंकि दोनों ग्रहों की ऊर्जा सकारात्मक और शक्तिशाली होती है। इसी कारण इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।

किन कार्यों के लिए शुभ है यह दिन?
1] सोना-चांदी खरीदना
2] विवाह और गृह प्रवेश
3] नया व्यापार शुरू करना
4] दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान

ज्योतिषियों का मानना है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल लंबे समय तक बना रहता है और जीवन में स्थायी सुख-समृद्धि लाता है।

अक्षय तृतीया पर क्या करें?
1] भगवान Lord Vishnu और माता लक्ष्मी की पूजा करें
2] जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान दें
3] घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें

 

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