धर्म-कर्म

कलावा उतारने से पहले जान लें ये नियम, कैंची से काटना शुभ है या अशुभ?

रक्षा सूत्र से जुड़ी मान्यताएं, उतारने का सही दिन, विधि और पुराने कलावे के विसर्जन का महत्व

डिजिटल डेस्क। हिन्दू धर्म में कलावा या मोली केवल एक धागा नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ, यज्ञ, व्रत और शुभ कार्यों के दौरान कलाई पर बांधा जाने वाला यह पवित्र धागा व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और बाधाओं से बचाने वाला रक्षा सूत्र माना जाता है। हालांकि, इसे बांधने जितना ही महत्वपूर्ण है इसे सही तरीके से उतारना। कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या कलावे को कैंची से काट सकते हैं, इसे कब उतारना चाहिए और पुराने कलावे का क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं धार्मिक मान्यताओं से जुड़े इन सवालों के जवाब।

क्यों खास माना जाता है कलावा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार कलावे के तीन रंग और उसके धागे सृष्टि के पालनहार ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिशक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। इसे कलाई पर बांधने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक सुरक्षा प्राप्त होती है। यही वजह है कि हर शुभ कार्य की शुरुआत में कलावा बांधने की परंपरा है।

कलावा उतारने के लिए कौन-सा दिन है सबसे शुभ?

धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को कलावा उतारने के लिए सबसे शुभ माना गया है। यदि किसी कारणवश मंगलवार को इसे नहीं उतार पाते हैं, तो शनिवार के दिन भी इसे उतारा जा सकता है। इन दोनों दिनों को शुद्धता, ऊर्जा संतुलन और आध्यात्मिक महत्व से जोड़ा जाता है।

क्या कैंची या चाकू से कलावा काटना चाहिए?

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार कलावे को किसी भी धारदार वस्तु जैसे कैंची, ब्लेड या चाकू से काटना उचित नहीं माना जाता। माना जाता है कि ऐसा करने से इसकी पवित्रता भंग होती है। इसलिए कलावे को हमेशा अपने हाथों से धीरे-धीरे खोलकर उतारना चाहिए। इससे धार्मिक मर्यादा भी बनी रहती है और शुभता भी बनी रहती है।

पुराने कलावे को फेंकना क्यों माना जाता है गलत?

अक्सर लोग पुराना कलावा उतारकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे उचित नहीं माना गया है। मान्यता है कि उतारे गए कलावे को किसी बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो उसे **पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी में दबाना भी शुभ माना जाता है। इससे पवित्र धागे का सम्मान बना रहता है।

कितने दिनों तक पहनना चाहिए कलावा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा लगभग 21 दिनों तक धारण किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान इसे सकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना जाता है। जब यह पुराना या क्षतिग्रस्त हो जाए, तब इसे विधिपूर्वक उतारकर नया कलावा बांधना शुभ माना जाता है। एक बार उतारे गए कलावे को दोबारा पहनने की सलाह नहीं दी जाती।

जानिए कलावा उतारने की सही प्रक्रिया

* सुबह स्नान करके स्वयं को शुद्ध करें।
* घर के मंदिर या पूजा स्थल पर बैठें।
* भगवान का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक कलावा हाथ से खोलें।
* उतारने के बाद उसे बहते जल में प्रवाहित करें या सुरक्षित रूप से पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।
* पुराने कलावे के स्थान पर नया कलावा धारण करना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता

कलावा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक है। इसलिए इसे बांधने और उतारने दोनों के दौरान धार्मिक नियमों और मर्यादाओं का पालन करना शुभ फलदायी माना जाता है।

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