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सुरों की मलिका आशा भोसले: दशकों तक गूंजती आवाज़ अब खामोश

अपने जीवन में कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए

डिजिटल डेस्क। भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में Asha Bhosle का नाम एक ऐसी पहचान रहा है, जिसने समय और पीढ़ियों की सीमाओं को पार कर लिया। अपनी मधुर, चंचल और बहुमुखी आवाज़ से उन्होंने संगीत जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 12 अप्रैल को 92 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया। उनका निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज़ और उनके गाने सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।

8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा भोसले, महान गायक Dinananth Mangeshkar की पुत्री और सुप्रसिद्ध गायिका Lata Mangeshkar की छोटी बहन थीं। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण गायन शुरू कर दिया था।

अपने शुरुआती करियर में संघर्षों का सामना करने के बावजूद, आशा भोसले ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर खुद को स्थापित किया। 1950 और 60 के दशक में संगीतकार O. P. Nayyar के साथ उनकी जोड़ी ने कई सुपरहिट गाने दिए। इसके बाद R. D. Burman के साथ उनकी साझेदारी ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

आशा भोसले की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा रही है। उन्होंने ग़ज़ल, रोमांटिक, पॉप, क्लासिकल और कैबरे जैसे विभिन्न शैलियों में गाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी आवाज़ में हर तरह के भाव को जीवंत करने की अद्भुत क्षमता थी।

वैसे तो उन्होंने कई गाने गाए हैं, लेकिन उनके प्रमुख 5 गीतों में शामिल हैं:

– Piya Tu Ab To Aaja (Caravan)
– Dum Maro Dum (Hare Rama Hare Krishna)
– In Aankhon Ki Masti (Umrao Jaan)
– Chura Liya Hai Tumne Jo Dil Ko (Yaadon Ki Baaraat)
– Yeh Mera Dil (Don)

अपने लंबे करियर में उन्होंने हजारों गीतों को अपनी आवाज़ दी और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए।

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