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वंदे मातरम्: राष्ट्रीय गीत के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह का पीएम मोदी ने किया शुभारंभ, कई लोग रहे उपस्थित

राज्यपाल मंगुभाई पटेल कार्यक्रम में भोपाल से वर्चुअली हुए शामिल

डिजिटल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वें वर्ष स्मरणोत्सव समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को किया। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल भोपाल राजभवन से वर्चुअली शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव मीनाक्षी सिंह सहित राजभवन के अधिकारी उपस्थित थे।

वंदे मातरम का इतिहास
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी। यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ था। बाद में बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसे अपने अमर उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया जो 1882 में प्रकाशित हुआ था। इस गीत की पुष्टि अरविंद द्वारा 16 अप्रैल 1907 को अंग्रेजी दैनिक बंदे मातरम में लिखे गए एक अंश से होती है, जिसमें लिखा है कि बंकिम ने अपने प्रसिद्ध गीत की रचना 32 साल पहले की थी। पुस्तक के रूप में इसके प्रकाशन से पहले, आनंद मठ बंगाली मासिक पत्रिका बंगदर्शन में धारावाहिक रूप से प्रकाशित होता था, जिसके संस्थापक संपादक बंकिम थे। 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने बर्लिन के स्टटगार्ट में भारत के बाहर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया। झंडे पर वंदे मातरम लिखा था। 1905 में कोलकाता में बंदे मातरम संप्रदाय की स्थापना हुई, जो मातृभूमि को पूजा के रूप में मानता था। लोग हर रविवार वंदे मातरम् गाते हुए प्रभात फेरी निकालते। रवींद्रनाथ टैगोर भी इसमें शामिल होते। 1906 में बिपिन चंद्र पाल और अरविंदो के संपादन में बंदे मातरम् अखबार शुरू हुआ, जिसने देश में आत्मनिर्भरता, एकता और स्वतंत्रता की भावना जगाई।

वंदे मातरम् गीत का इस प्रकार है-

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

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