सामाजिक उद्यमिता और कौशल विकास से सशक्त होगा भारत: राज्यपाल मंगुभाई पटेल
“समर्थ भारत कॉन्क्लेव” में युवाओं की भूमिका, नवाचार और समावेशी विकास पर विशेष चर्चा

डिजिटल डेस्क। मंगुभाई पटेल ने कहा कि कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता ही विकसित भारत के निर्माण का मजबूत आधार है। उन्होंने इस दिशा में वैचारिक पहल को समयानुकूल और सराहनीय बताया। वे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित पांचवें “समर्थ भारत कॉन्क्लेव” के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
कॉन्क्लेव का विषय “विकसित भारत के निर्माण में कौशल विकास और सामाजिक उद्यमिता” रखा गया। कार्यक्रम से पहले राज्यपाल ने कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
सामाजिक चुनौतियों के समाधान पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि कौशल और सामाजिक उद्यमिता के माध्यम से स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण, लैंगिक समानता, प्राथमिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियों के समाधान खोजे जाने चाहिए। उन्होंने इस मंच को शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने का प्रभावी माध्यम बताया।
युवाओं को बनाना होगा परिवर्तन का आधार
उन्होंने कहा कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए युवाओं को जमीनी स्तर से जोड़ना आवश्यक है। युवाओं को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नवाचार अपनाना होगा और समावेशी विकास में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।
सरकार और संस्थानों की संयुक्त भूमिका जरूरी
राज्यपाल ने सरकारी, निजी और गैर-लाभकारी संगठनों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल और तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि
स्किल इंडिया मिशन,
स्टार्ट-अप इंडिया,
स्टैंड-अप इंडिया,
डिजिटल इंडिया और
मेक इन इंडिया
जैसी पहलों ने देश में मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार किया है।
शिक्षा संस्थानों की बढ़ी जिम्मेदारी
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को ऐसे युवाओं को तैयार करना चाहिए जो तकनीकी, प्रबंधकीय और उद्यमशील क्षमताओं से युक्त हों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर वोकेशनल ट्रेनर्स का सम्मान भी किया गया। आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने स्वागत किया, जबकि स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के चान्सलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षाविद् और विषय-विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।



