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मध्यप्रदेश में बनेगा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर, सिंहस्थ-2028 तक तैयार होंगे 44 साइबर कमांडो और 3 हजार साइबर वॉरियर

डेटा की सुरक्षा भी सीमा सुरक्षा जितनी अहम : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

डिजिटल डेस्क। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डिजिटल युग में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है और इसकी सुरक्षा राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। बदलती तकनीकों के साथ साइबर अपराधों और डिजिटल खतरों का स्वरूप लगातार बदल रहा है, ऐसे में साइबर सुरक्षा को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।


प्रधानमंत्री मोदी ने समय रहते पहचानी डिजिटल चुनौतियां

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता के कारण देश साइबर अपराध, डीप फेक और डिजिटल सुरक्षा जैसी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी समय से पहले आने वाली चुनौतियों को पहचानकर उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाते हैं और समाज को जागरूक भी करते हैं।


महू में स्थापित होगा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर

राज्य में साइबर सुरक्षा को नई मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और साइबर हमलों की पूर्व पहचान एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आधुनिक तकनीकों से लैस यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रिया आधारित नहीं बल्कि संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।


डीबीटी और यूपीआई ने बढ़ाया डिजिटल विश्वास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई जनधन योजना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचाना संभव बनाया है। यूपीआई जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

उन्होंने कहा कि जब नागरिक तेजी से डिजिटल सेवाओं पर निर्भर हो रहे हैं, तब सरकार की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे।


साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधी एक झटके में लोगों की जीवनभर की कमाई हड़प सकते हैं। ऐसे अदृश्य खतरों से निपटने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण संपत्ति है और डेटा ब्रीच जैसी स्थिति में आर्थिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। इसलिए प्रदेश सरकार साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।


ई-गवर्नेंस में अग्रणी है मध्यप्रदेश

प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश की कई डिजिटल पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने बताया कि नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो साइबर खतरों की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया का कार्य कर रहा है।


1700 से अधिक शासकीय सेवाएं हुईं डिजिटल

एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक श्री आशीष वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में 1700 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा का महत्व भी बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि एमपी-सीईआरटी, सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) के माध्यम से साइबर सुरक्षा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।


सिंहस्थ-2028 से पहले तैयार होंगे 44 साइबर कमांडो

एडीजी श्री ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 6 साइबर कमांडो कार्यरत हैं और 38 अन्य का चयन किया जा चुका है। सिंहस्थ-2028 से पहले कुल 44 प्रशिक्षित साइबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे।

इसके साथ ही लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और युवा स्वयंसेवकों को “साइबर वॉरियर” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो बड़े आयोजनों और महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा में सहयोग करेंगे।


1930 हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान बने सुरक्षा की ढाल

एडीजी श्री मनोहर ने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930, त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली और व्यापक जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे अनेक मामलों में नागरिकों की बड़ी धनराशि सुरक्षित कराई जा चुकी है।


डिजिटल डेटा संरक्षण और सुरक्षित एआई पर हुई चर्चा

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, साइबर अपराध नियंत्रण, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, डिजिलॉकर, एपीआई सेतु, एंड-पॉइंट सुरक्षा, वेब सुरक्षा तथा सुरक्षित एआई परिवर्तन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए।


मजबूत साइबर फ्रेमवर्क के लिए विभागों ने दिए सुझाव

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) ने समूह चर्चाओं में भाग लिया। जोखिम प्रबंधन, डेटा सेंटर सुरक्षा, जीरो-ट्रस्ट मॉडल, डेटा वर्गीकरण, क्षमता निर्माण और साइबर जागरूकता जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन किया गया।

प्रतिभागियों ने राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और अनुशंसाएं प्रस्तुत कीं।

 

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