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भूजल संकट: पर्यावरण सहित आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा असर, इजराइल जैसे देशों से लें सीख

जल संरक्षण के उपाय नहीं अपनाएं तो उठाने पड़ेंगे कई नुकसान

डिजिटल डेस्क। जल हमारे जीवन का जरुरी हिस्सा है, इसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन आजकल भूजल संकट एक गंभीर समस्या के तौर पर उभर रहा है। पानी की कमी के कारण उद्योगों और व्यवसायों को भी नुकसान हो रहा है, जिससे आर्थिक विकास पर असर पड़ रहा है। इसका कारण जनसंख्या वृद्धि, अत्यधिक निकासी, कृषि में अधिक निर्भरता, जलवायु परिवर्तन, और अपर्याप्त जल प्रबंधन है। खासकर उत्तर प्रदेश में ये संकट तेजी से उभर रहा है। भूजल संसाधन मूल्यांकन के अनुसार समाज सेविका प्रशंसा गुप्ता बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में भूजल संकट का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

ये कहता है ​आकड़ा
साल 2024 में भूजल संसाधन मूल्यांकन के अनुसार, राज्य के कई विकास खंडों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। 50 विकास खंड अति-दोहित, 45 गंभीर और 165 अर्ध-गंभीर श्रेणी में आ चुके हैं। बता दें वर्ष 2000 में जहां राज्य के 745 विकास खंड सुरक्षित माने जाते थे, 2024 तक यह संख्या घटकर केवल 566 रह गई है। ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि यदि हमने अभी से चेतावनी नहीं ली और जल संरक्षण के उपाय नहीं अपनाए, तो आने वाले समय में जल संकट और भयावह हो सकता है।

भूजल पर निर्भर है औद्योगिक आवश्यकताएं
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 70% सिंचाई, 80% पेयजल आपूर्ति और 85% औद्योगिक आवश्यकताएं भूजल पर निर्भर हैं। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के चलते बन रहे कंक्रीट के ढांचे, पारंपरिक जल स्त्रोतों को खत्म कर रहे हैं, जिससे वर्षा जल का भूमि में रिसाव रुक रहा है। यदि हम सभी मिलकर एकजुट प्रयास करें, तो हम भूजल को बचा सकते हैं। बस ज़रूरत है- समझ की, संरचना की और संकल्प की।

ऐसे करें वर्षा जल का संरक्षण

1. तालाब बनाकर वर्षा जल को खेतों में रोका जा सकता है।
2. मेड़बंदी से मिट्टी का कटाव रोकने के साथ-साथ भूजल स्तर में भी सुधार संभव है।
3. वर्षा जल संचयन की व्यवस्था घरों और संस्थानों में लागू कर संग्रहित जल को उपयोगी बनाया जा सकता है।
4. रिचार्ज पिट बनाकर साफ वर्षा जल को भूमि में भेजा जा सकता है। इसके लिए बालू, मुरम और गिट्टी से बना फिल्टर चैंबर बेहद उपयोगी होता है।

इजराइल जैसे देशों से लें सीख
इज़राइल जैसे देश ने यह साबित किया है कि जल संकट का समाधान संभव है। वहां लगभग 90% अपशिष्ट जल को उपचारित कर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। खासकर कृषि सिंचाई में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों से पानी की बर्बादी को काफी हद तक रोका गया है।

मिलकर करना होगा प्रयास
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, आज भी विश्व में 2 अरब से अधिक लोग सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएं संकट को बढ़ा रही हैं। भूजल संकट का समाधान किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार के बस की बात नहीं है। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम अभी से वर्षा जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन और अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग जैसे उपाय अपनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को हम एक सुरक्षित जल भविष्य दे सकते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आने वाली पीढ़ी हमसे सिर्फ एक चीज की उम्मीद करती है…
शुद्ध वातावरण और शुद्ध जल! क्या हम और आप मिलकर संकल्प लें! भूजल का पुनः उपयोग और वर्षा जल का संरक्षण करने का?

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