Karwa Chauth: भोपाल में रात 8:31 बजे होगा चंद्रोदय, जानें पूजा विधि और व्रत के नियम
पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ महिलाएं रखेंगी व्रत; चंद्र दर्शन के बाद पूरा होगा उपवास, जानें पूजा की तैयारी और जरूरी परंपराएं

डिजिटल डेस्क। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। भोपाल में आज चंद्रोदय रात 8:31 बजे होने का समय बताया गया है। महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद पारंपरिक विधि से पूजा पूरी कर व्रत खोलेंगी।
करवा चौथ की पूजा का क्या है महत्व?
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में वैवाहिक प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती, भगवान शिव, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, व्रत रखने की परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
करवा चौथ पर कैसे करें पूजा?
करवा चौथ के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद उपवास रखती हैं। शाम को पूजा स्थल पर माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पूजा में रोली, अक्षत, पुष्प, दीपक, धूप, मिठाई और करवा आदि सामग्री का उपयोग किया जाता है।
पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। इसके बाद चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा की जाती है। चंद्र दर्शन होने पर उन्हें जल अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं।
चंद्र दर्शन के बाद ही खोलें व्रत
करवा चौथ के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। भोपाल में चंद्रोदय का समय रात 8:31 बजे बताया गया है। हालांकि, बादलों या स्थानीय परिस्थितियों के कारण चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है। ऐसे में श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करें।
व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
करवा चौथ का व्रत श्रद्धा और अनुशासन के साथ रखा जाता है। व्रत के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करें, कथा सुनें और चंद्रमा को अर्घ्य दें। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, गर्भावस्था या नियमित दवा लेने की स्थिति में निर्जला उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
प्रेम और विश्वास का पर्व है करवा चौथ
करवा चौथ केवल उपवास और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान को महत्व देने का अवसर भी है। बदलते समय में इस पर्व का स्वरूप भले ही बदल रहा हो, लेकिन परिवार की खुशहाली और एक-दूसरे के प्रति समर्पण की भावना आज भी इसकी प्रमुख पहचान बनी हुई है।



