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ग्रामीण हुनर को बाजार से जोड़ रही प्रदर्शनी, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम पहल: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

नाबार्ड और ओजस्विनी के राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-बिक्री महोत्सव का शुभारंभ, 2 नवंबर तक बिट्टन मार्केट के दशहरा मैदान में सजेगा हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पादों का बाजार

डिजिटल डेस्क। ग्रामीण भारत की कला, पारंपरिक हुनर और मेहनत को जब बाजार मिलता है, तो आत्मनिर्भरता की राह और मजबूत होती है। स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को पहचान दिलाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की इसी सोच के साथ भोपाल में राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-बिक्री महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने नाबार्ड और ओजस्विनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों की महत्वपूर्ण मिसाल बताया।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि यह प्रदर्शनी देश के गांवों में मौजूद कलात्मक प्रतिभा, परिश्रम और रचनात्मकता को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। यहां विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति, खान-पान और पारंपरिक शिल्प की झलक देखने को मिलती है। ऐसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि उत्पाद प्रदर्शनी केवल खरीदारी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि हुनरमंद कारीगरों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करती हैं। राज्यपाल ने नागरिकों से अपील की कि वे महोत्सव में पहुंचकर उत्पादों का अवलोकन करें, देश की समृद्ध कला-संस्कृति को करीब से जानें और स्वदेशी उत्पाद खरीदकर कारीगरों के श्रम एवं हुनर को प्रोत्साहित करें।

ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

राज्यपाल ने कहा कि नाबार्ड कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और उद्यमिता को प्रोत्साहित कर ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।

उन्होंने हुनरमंद कारीगरों और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना करते हुए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, ओजस्विनी फाउंडेशन और अन्य सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भोपाल में आयोजित यह महोत्सव ग्रामीण कौशल, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक आत्मनिर्भरता का सुंदर संगम है।

त्योहारों के मौसम में स्थानीय उत्पादों को मिले प्रोत्साहन

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के ऐसे आयोजनों को व्यापक प्रचार-प्रसार और सक्रिय जनभागीदारी की जरूरत है। त्योहारों के दौरान इन मेलों के माध्यम से स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने का बेहतर अवसर मिल सकता है।

उन्होंने आयोजकों और सहयोगी संस्थाओं से अपील की कि नवाचारों के माध्यम से उत्पादों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि ग्रामीण कारीगरों को नए ग्राहक मिलें और उनके काम को व्यापक पहचान हासिल हो सके।

शिल्पकारों से किया संवाद, उत्पादों की सराहना

राज्यपाल श्री पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया और फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान उनका पुष्पगुच्छ, शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया। राज्यपाल ने मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के स्टॉलों का भ्रमण किया। उन्होंने कारीगरों से बातचीत कर उनके उत्पादों, पारंपरिक कला और कार्यों के बारे में जानकारी ली तथा उनके प्रयासों की सराहना की।

यह राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-बिक्री महोत्सव 26 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भोपाल के बिट्टन मार्केट स्थित दशहरा मैदान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें मध्यप्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों के शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भागीदारी है।

ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत करने पर जोर

कार्यक्रम में नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री एस.सी. साहू ने स्वागत उद्बोधन दिया और प्रदर्शनी में शामिल विभिन्न स्टॉलों एवं उत्पादों की जानकारी साझा की। ओजस्विनी समदर्शिनी न्यास की अध्यक्ष डॉ. सुधा मलैया ने उत्पाद मेले के निरंतर आयोजन और इससे जुड़े प्रयासों पर प्रकाश डाला।

मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष श्री आर.सी. बेहरा ने ग्रामीण कारीगरों, स्व-सहायता समूहों और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं में बैंक की वित्तीय सहायता संबंधी पहलों की जानकारी दी। वहीं, मध्यप्रदेश नाबार्ड की प्रमुख श्रीमती सी. सरस्वती ने शिल्पकारों के सामाजिक, आर्थिक और मानसिक सशक्तिकरण के लिए नाबार्ड की भूमिका और प्रयासों को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंत में श्रीमती मधुरिमा ने आभार व्यक्त किया। शुभारंभ अवसर पर स्व-सहायता समूहों के प्रतिनिधि, एफपीओ सदस्य तथा मध्यप्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिल्पकार उपस्थित रहे।

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