18 जिलों में मनाई जाएगी नर्मदा जयंती, नदी संरक्षण से समाज और युवाओं को जोड़ने पर जोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
हर महीने होगी 'नर्मदा समग्र' की समीक्षा बैठक, 'नमन मिशन' के जरिए नदी को निर्मल और अविरल बनाने का रोडमैप तैयार, अमरकंटक में बनेगा जैव विविधता प्रबंधन संस्थान

डिजिटल डेस्क। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक जीवनधारा है। प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नर्मदा और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में नर्मदा को स्वच्छ, अविरल और अतिक्रमण मुक्त बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नदी संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए और इसमें समाज, विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित ‘नर्मदा समग्र’ की बैठक में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब नर्मदा समग्र की समीक्षा बैठक प्रत्येक माह आयोजित होगी, ताकि नदी क्षेत्र के विकास और संरक्षण से जुड़े निर्णयों की नियमित निगरानी की जा सके।
18 जिलों में होंगे नर्मदा जयंती के विशेष आयोजन
बैठक में जानकारी दी गई कि नर्मदा तट से जुड़े प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती के अवसर पर व्यापक धार्मिक, सांस्कृतिक और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में भव्य नर्मदा आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं और नदी संरक्षण से जुड़े जागरूकता अभियान शामिल रहेंगे।
परिक्रमा पथ होगा अतिक्रमण मुक्त, लगेंगे मार्ग संकेतक
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए और यात्रियों की सुविधा के लिए पूरे मार्ग पर दिशा-सूचक एवं सूचना पट्टिकाएं लगाई जाएं। उन्होंने कहा कि नर्मदा तट पर स्थित धार्मिक स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए तथा प्रमुख मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र और आवश्यकता अनुसार दीनदयाल रसोई की व्यवस्था भी विकसित की जाए।
इसके साथ ही नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर स्थित सभी आश्रमों का सर्वे कर उनकी सूची तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।
‘नमन मिशन’ से होगा नर्मदा घाटी का समग्र विकास
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ‘नमन मिशन’ का प्रस्तुतीकरण दिया। यह मिशन नर्मदा और उसके घाटी क्षेत्र के संरक्षण एवं समग्र विकास के लिए एक समर्पित संस्थागत व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री इसकी साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे।
मिशन के संचालन के लिए वर्ष 2026-27 का विस्तृत कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार कर लिया गया है। इसके लिए प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के राज्य अनुदान का प्रस्ताव रखा गया है। मिशन के क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों के साथ 10 विशेषज्ञों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
तीन समितियों के अनुभव का भी मिलेगा लाभ
सरकार ने तय किया है कि नमन मिशन के प्रभावी संचालन के लिए पहले से कार्यरत तीन प्रमुख समितियों—मंत्रिमंडल समिति, अंतरविभागीय कार्यकारिणी समिति तथा राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति—के अनुभव और सहयोग का भी उपयोग किया जाएगा।
अमरकंटक में बनेगा जैव विविधता प्रबंधन संस्थान
वन विभाग ने बैठक में बताया कि नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 32 लाख रुपये की परियोजना तैयार कर ली गई है। साथ ही नर्मदा घाटी क्षेत्र के लगभग 415 हेक्टेयर वन क्षेत्र में 2.70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
नर्मदा कोष पोर्टल और एसटीपी परियोजनाओं पर भी तेजी
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने बताया कि नर्मदा क्षेत्र के शहरी घाटों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए ‘नर्मदा कोष पोर्टल’ विकसित किया जा रहा है और संबंधित नगर निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माणाधीन हैं, जिन्हें दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, ओंकारेश्वर के समग्र विकास के लिए स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
पर्यटन और कृषि को भी मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन विभाग ने बताया कि महेश्वर में 18 होमस्टे विकसित किए जा चुके हैं, जबकि ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत 13 गांवों में 79 होमस्टे तैयार किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देश दिए कि नर्मदा घाटी क्षेत्र के किसानों को नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो।
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से मिलेगा नया आयाम
बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खनिज, योजना, आर्थिकी एवं सांख्यिकी सहित विभिन्न विभागों ने नर्मदा घाटी क्षेत्र में संचालित विकास एवं संरक्षण कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक संकल्प बनना चाहिए।



