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‘सेफ क्लिक 2.0’ का आगाज: साइबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाएगा मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- सावधानी, जागरूकता और सहभागिता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे मजबूत कवच

डिजि​टल डेस्क। । डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशव्यापी साइबर जागरूकता अभियान ‘सेफ क्लिक 2.0’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि साइबर खतरे एक ऐसे अदृश्य दुश्मन की तरह हैं, जो बिना दस्तक दिए लोगों की निजी और आर्थिक सुरक्षा पर हमला कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साइबर जागरूकता पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार बुकलेट और अभियान के आधिकारिक वीडियो का विमोचन किया। साथ ही साइबर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 24 जून से 8 जुलाई तक प्रदेश के सभी 55 जिलों, 10 संभागों और 50 हजार से अधिक गांवों में संचालित होगा।

‘रुको, सोचो और फिर एक्शन लो’

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को साइबर अपराधियों के नए-नए हथकंडों से सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि यदि कोई अनजान लिंक मिले या डराने-धमकाने वाली कॉल आए तो तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले रुकें, सोचें और फिर निर्णय लें। उन्होंने कहा कि लालच और जल्दबाजी अक्सर आर्थिक नुकसान का कारण बनती है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर सुरक्षा के तीन मूल मंत्र

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को साइबर सुरक्षा के लिए तीन महत्वपूर्ण सूत्र बताए—

  • जागरूकता : साइबर अपराधों की जानकारी रखें।
  • सावधानी : डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन गतिविधियों में सतर्क रहें।
  • सहभागिता : स्वयं जागरूक बनें और दूसरों को भी जागरूक करें।

उन्होंने कहा कि जानकारी ही सुरक्षा है और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव।

डिजिटल दौर के ‘राक्षस’ हैं साइबर अपराधी

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, रैनसमवेयर और फर्जी निवेश योजनाएं आज साइबर अपराध के प्रमुख स्वरूप बन चुके हैं। साइबर अपराधी आधुनिक दौर के ऐसे राक्षस हैं, जो मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के माध्यम से लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डालते हैं।

उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका निभाती है और साइबर अपराधों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई कर रही है।

33 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची जागरूकता

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश पुलिस ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। इस बार अभियान का विस्तार स्कूलों, पंचायतों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

ई-जीरो एफआईआर और 1930 हेल्पलाइन बनी राहत का माध्यम

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि साइबर अपराध केवल आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 25 दिसंबर 2025 से ई-जीरो एफआईआर की सुविधा शुरू की गई है, जिसके माध्यम से एक लाख रुपये तक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तत्काल शिकायत दर्ज की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में साइबर अपराध से जुड़ी लगभग 135 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराई गई, जिससे पीड़ितों को राहत मिल सकी।

गांव-गांव पहुंचेगा ‘सेफ क्लिक 2.0’

डीजीपी ने बताया कि अभियान के दौरान बैंकिंग सुरक्षा, महिला सुरक्षा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव जैसे विषयों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, जनसंवाद, सोशल मीडिया अभियान और अन्य रचनात्मक माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।

साइबर अपराध रोकने में चल रहे विशेष ऑपरेशन

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराध नियंत्रण के लिए ऑपरेशन फास्ट, ऑपरेशन फेस्ट, ऑपरेशन मैट्रिक्स और ऑपरेशन नयन जैसे विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के लिए पुलिस को प्रतिष्ठित डीएससीआई अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

जन-जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि साइबर सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए हर नागरिक डिजिटल रूप से जागरूक बने। उन्होंने कहा कि यदि समाज सजग रहेगा तो साइबर अपराधियों के लिए कोई अवसर नहीं बचेगा। “सेफ क्लिक 2.0” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सुरक्षित डिजिटल मध्यप्रदेश की दिशा में जनभागीदारी का एक सशक्त प्रयास है।

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