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शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा, छह शिक्षकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया सम्मानित, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई; नवाचार, शोध, कौशल और समावेशी शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान की सराहना

डिजिटल डेस्क। शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान विद्यार्थियों तक पहुंचाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह भविष्य की दिशा तय करने वाला मार्गदर्शक भी होता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के छह शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नेशनल टीचर अवॉर्ड-2026 समारोह में इन शिक्षकों को शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया।

राष्ट्रीय सम्मान पाने वालों में डॉ. अर्चना शुक्ला, श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह, सुश्री संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, श्रीमती रीना गुप्ता और श्रीमती ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं। इन शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्र में नए प्रयोगों, समर्पण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए गए प्रयासों से शिक्षा को नई दिशा देने का काम किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा- शिक्षकों की उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश के शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। मध्यप्रदेश के इन शिक्षकों ने नवाचार, शोध, तकनीक, कौशल विकास और समावेशी शिक्षा के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां प्रदेश के अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने तथा शिक्षकों को नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

पर्यावरण और विज्ञान को बनाया शिक्षा का माध्यम

डॉ. अर्चना शुक्ला विज्ञान एवं जीव विज्ञान की शिक्षिका हैं। करीब 15 वर्षों से वे परियोजना आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप उन्होंने विद्यार्थियों के साथ कम लागत वाली कई अभिनव परियोजनाएं संचालित कीं।

उनके प्रयासों में एक हजार से अधिक स्पैरो हाउस की स्थापना, विद्यालय परिसर के पेड़ों की क्यूआर कोड आधारित डिजिटल मैपिंग और ‘प्लांट इमोशन’ जैसी परियोजनाएं विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन प्रयोगों ने विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर प्रकृति और विज्ञान को समझने का अवसर दिया।

सीमित संसाधनों में बदली विद्यालय की तस्वीर

श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह, अंग्रेजी शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।

उनके प्रयासों का असर विद्यालय में साफ दिखाई दिया। विद्यार्थियों की संख्या 69 से बढ़कर 202 हुई, जबकि उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंची। उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने और दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया।

गणित को बनाया रोचक और प्रयोग आधारित

सुश्री संगीता यादव ने गणित शिक्षण में नवाचार और शिक्षक सशक्तिकरण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया है। उन्होंने गणितोत्सव, क्वेस्ट फॉर मैथमेटिक्स, मैथेमाइंड और बैगलेस मैथमेटिक्स डे जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया।

तकनीक आधारित शिक्षा के साथ-साथ वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल को भी शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ रही हैं। उनका प्रयास गणित को कठिन विषय के बजाय आनंद, प्रयोग और खोज से जोड़ना है।

शोध और जलवायु परिवर्तन पर फोकस

प्रो. सौरव दत्ता, आईआईएसईआर भोपाल में पादप जीवविज्ञानी हैं। शिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से वे विद्यार्थियों में मौलिक और शोधपरक सोच विकसित करने पर जोर देते हैं।

उन्हें आईआईएसईआर भोपाल की ओर से दो बार डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवॉर्ड भी मिल चुका है। जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पौधों के विकास से जुड़ा उनका शोध विशेष महत्व रखता है।

दिव्यांग प्रशिक्षुओं को डिजिटल कौशल से बनाया आत्मनिर्भर

श्रीमती रीना गुप्ता, शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन में श्रवण एवं दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं को कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड का प्रशिक्षण देती हैं।

पिछले 16 वर्षों से वे दिव्यांग प्रशिक्षुओं को कंप्यूटर और डिजिटल कौशल सिखाकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार कर रही हैं। महिलाओं और वंचित वर्ग के दिव्यांग प्रशिक्षुओं को आत्मनिर्भर बनाने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

प्रशिक्षण से रोजगार तक पहुंचाया युवाओं को

श्रीमती ज्योतिबाला राठौर, राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला), इंदौर में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में छह वर्ष और शिक्षण क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है।

उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उपलब्धियां हासिल की हैं। प्लेसमेंट अधिकारी के रूप में भी उन्होंने अनेक प्रशिक्षुओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

छह उपलब्धियां, एक गौरव- मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के इन छह शिक्षकों की उपलब्धियां शिक्षा के अलग-अलग आयामों को सामने लाती हैं। किसी ने पर्यावरण और विज्ञान को शिक्षा से जोड़ा, किसी ने सीमित संसाधनों में स्कूल की तस्वीर बदली, तो किसी ने गणित, शोध, डिजिटल कौशल और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई दिशा दी।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इन छह शिक्षकों का सम्मान मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और पूरे शिक्षक समुदाय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। इन शिक्षकों की सफलता आने वाली पीढ़ी के शिक्षकों और विद्यार्थियों को नवाचार, समर्पण और उत्कृष्टता की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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