भारत की सनातन ज्ञान परंपरा का केंद्र बनेगा एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास
सिंहस्थ-2028 से पहले निकलेगी भव्य एकात्म यात्रा, ओंकारेश्वर और उज्जैन बनेंगे देश-दुनिया के आध्यात्मिक प्रेरणा केंद्र

डिजिटल डेस्क। मध्यप्रदेश की पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में विकसित हो रहा एकात्म धाम आने वाले समय में भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकात्मता का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को एकात्म धाम परिसर में भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास करते हुए कहा कि यह धाम आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, समरसता और चरित्र निर्माण की प्रेरणा देगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत की दिव्य संन्यास परंपरा के प्रतिनिधियों, षड्दर्शन संत मंडल के पूज्य संतों और विशिष्ट अतिथियों के साथ 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण का शुभारंभ किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूज्य संतों के कर-कमलों से मंदिर निर्माण का पावन आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री अपनी पत्नी श्रीमती सीमा यादव के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।
संतों के आशीर्वाद से जीवन में उजागर होती है परमात्मा की अनुभूति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने परमात्मा को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है, लेकिन संतों के आशीर्वाद से उनके नाम और उनकी अनुभूति हमारे जीवन में उजागर होती है। उन्होंने कहा कि संतों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से ओंकारेश्वर में एक ऐसा दिव्य धाम आकार ले रहा है, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए पंचायतन पूजन की परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित किया था। एकात्म धाम में बनने वाला पंचायतन मंदिर इसी महान भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
सिंहस्थ-2028 से पहले निकलेगी भव्य एकात्म यात्रा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि सिंहस्थ-2028 से पहले एक भव्य एकात्म यात्रा निकाली जाएगी, जिसका समापन सिंहस्थ के दौरान होगा। यह यात्रा देश और दुनिया तक भारतीय ज्ञान परंपरा, संत परंपरा और एकात्म दर्शन का संदेश पहुंचाएगी।
उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर और उज्जैन केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। आने वाले समय में इन दोनों पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ विश्वस्तरीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मांधाता पर्वत पर आकार ले रहा अलौकिक एकात्म धाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि मांधाता पर्वत पर विकसित हो रहा एकात्म धाम आने वाले समय में अत्यंत दिव्य और अलौकिक स्वरूप में दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य इस संसार की यात्रा का एक पथिक है और यह सौभाग्य की बात है कि हमें ऐसे दिव्य धाम के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि एकात्म धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह आंतरिक चेतना के जागरण, आत्मिक शांति, सामाजिक समरसता, सद्भाव, संस्कार और चरित्र निर्माण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्व पहचान रहा भारत का वैभव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज विश्व भारत के वैभव, शक्ति और सांस्कृतिक विरासत को नई दृष्टि से पहचान रहा है। राज्य सरकार भी धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के विकास तथा उन्हें बेहतर सुविधाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू किए गए एकात्म धाम और मंदिर निर्माण के कार्य को वर्तमान सरकार आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में मौजूद अंतर्विरोधों और नकारात्मक शक्तियों के बीच आदि गुरु शंकराचार्य और मां नर्मदा की कृपा से समाज को एकात्मता और सकारात्मक दिशा मिलेगी।
पंचायतन मंदिर में होंगे पंचदेवों के दिव्य स्वरूप
प्राचीन पंचायतन शैली पर आधारित इस भव्य मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय स्थापित होगा। मंदिर के चारों कोनों पर भगवान विष्णु, भगवान सूर्य, भगवान गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय निर्मित किए जाएंगे।
मंदिर के मुख्य देवालय का शिखर सोमतिलक शैली में बनाया जाएगा, जबकि गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में निर्मित होगा। मंदिर में चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था होगी, जिससे इसकी स्थापत्य विशेषता और भव्यता और अधिक बढ़ेगी।
100 नक्काशीदार स्तंभ और 121 कलशों से सजेगा मंदिर
पंचायतन मंदिर का निर्माण भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला की परंपराओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। मंदिर परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु संरचनाएं स्थापित की जाएंगी। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा।
मंदिर को 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान यानी जगति पर निर्मित किया जाएगा। संपूर्ण मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा। इसके निर्माण में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है।
प्राचीन नागर स्थापत्य का जीवंत उदाहरण बनेगा मंदिर
पंचायतन मंदिर पारंपरिक नागर स्थापत्य शैली में निर्मित किया जा रहा है। मंदिर का बाहरी वास्तु-विन्यास भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं के संयोजन से सुसज्जित होगा। भव्य तोरण-द्वार मंदिर की स्थापत्य सुंदरता को और अधिक आकर्षक बनाएंगे।
एकात्म धाम में आकार ले रहा यह पंचायतन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला के पुनरुत्थान का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायतन उपासना का मूल संदेश यही है कि विभिन्न देव स्वरूपों में उसी एक परम ब्रह्म की उपासना की जाती है और यही भारतीय संस्कृति की एकात्म दृष्टि का सबसे बड़ा संदेश है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।



