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गुरु पूर्णिमा पर पूरे मध्यप्रदेश में गूंजेगी गुरु-शिष्य परंपरा, ‘महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व’ मनाने की तैयारी

गुरु पूर्णिमा से पहले ही कराए सभी सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण

डिजिटल डेस्क। मध्यप्रदेश में इस वर्ष गुरु पूर्णिमा को भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के महापर्व के रूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि 29 जुलाई को पूरे प्रदेश में ‘महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व’ का आयोजन किया जाए। इसमें सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के साथ खेल, संगीत, नाटक, चित्रकला एवं अन्य कला संस्थानों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

सोमवार को विधानसभा स्थित समिति कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और प्राचीन ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

गुरु पूर्णिमा से पहले पूरे हों सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जिन सांदीपनि विद्यालयों का उद्घाटन अभी शेष है, उनका लोकार्पण गुरु पूर्णिमा से पहले ही कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि ने गुरुकुल परंपरा को सशक्त आधार दिया और समान भाव से सभी विद्यार्थियों को शिक्षा देकर राष्ट्रनिर्माण का आदर्श प्रस्तुत किया।

महर्षि सांदीपनि पर प्रकाशित होगी विशेष पुस्तिका

बैठक में मुख्यमंत्री ने महर्षि सांदीपनि के जीवन, उनके आदर्शों और गुरुकुल शिक्षा पद्धति में उनके योगदान पर आधारित एक लघु पुस्तिका प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए। यह पुस्तिका प्रदेश के विद्यालयों में वितरित की जाएगी, ताकि विद्यार्थी भारतीय शिक्षा परंपरा से परिचित हो सकें।

हर स्कूल-कॉलेज में होगा गुरु पूजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में गुरु पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही विद्यालयों में मनाए जाने वाले मित्रता दिवस पर श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रेरक प्रसंग विद्यार्थियों को बताया जाएगा।

जनभागीदारी से बने सांस्कृतिक अभियान

डॉ. यादव ने कहा कि ‘महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व’ केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर जनभागीदारी का उत्सव बने। इसका उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में गुरुजनों के प्रति सम्मान, भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था तथा नैतिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव

अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन सभी शैक्षणिक संस्थानों में मां सरस्वती के पूजन, सरस्वती वंदना, गुरु सम्मान, व्याख्यान, छात्र-शिक्षक संवाद, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। सभी गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

बैठक में विभिन्न विभागों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं संस्कृति विभाग के प्रतिनिधियों ने आयोजन की रूपरेखा और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। उद्देश्य यह है कि गुरु पूर्णिमा को पूरे प्रदेश में भारतीय संस्कृति, शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा के उत्सव के रूप में स्थापित किया जा सके।

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