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देवउठनी एकादशी: तुलसी मैया को जरुर चढ़ाएं चुनरी और बांध दें का पीला धागा, मिलेंगे शुभ फल

एकादशी का महत्व, शुभ मुहूर्त और कुछ जरुरी बातें

डिजिटल डेस्क। हर साल की तरह इस साल भी देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और इस दिन के बाद से ही शुभ एवं मंगल कार्यों की शुरुआत होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए पूजन और व्रत से इंसान के जीवन में भाग्य का उदय होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ तुलसी का पूजन विशेष फल देता है। तुलसी को लक्ष्मी का रूप माना गया है और बिना तुलसी के विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है, अगर इस दिन तुलसी के पौधे से जुड़े कुछ आसान उपाय किए जाएं, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

देवउठनी एकादशी का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर शंखासुर का वध किया था। यह युद्ध बहुत ही लंबा चला था। शंखासुर का वध करने के बाद भगवान विष्णु क्षीर सागर में जाकर सो गए थे। इसके बाद वह कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का उठे थे। इस दिन व्रत करने और पूरे विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कब है देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 01 नवंबर को सुबह 09:11 बजे होगी, इसका समापन 02 नवंबर को सुबह 07:31 बजे, ऐसे में इस साल देवउठनी एकादशी का व्रत 01 नवंबर 2025 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है, इस व्रत और पूजा से समस्त पापों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

तुलसी में पीले रंग का धागा बांधे
ज्याेतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन पीले रंग का धागा लें और उसमें 108 गांठ लगा लें। इसके बाद इसे तुलसी के पौधे में बांध दें, फिर विधिवत पूजा करने के साथ प्रार्थना करें। यह उपाय करने से धन-समृद्धि और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी। इसके साथ ही कहा इस दिन तुलसी का पूजन करना तथा भोग-भोजन में तुलसी के पत्ते शामिल करना शुभ माना जाता है। तुलसी विवाह का विधान भी इसी एकादशी से जुड़ा हुआ है – जहां भगवान विष्णु को शालिग्राम स्वरूप में तुलसी से ‘विवाह’ कराया जाता है।

पीला धागा बांधने की प्रक्रिया
कोई मनोकामना पूरी करना चाहते हैं तो पीले धागे को अपने शरीर की लंबाई के बराबर काट लें। अब तुलसी के पास जाकर इस पीले धागे में 108 गांठ बांधें। इस दौरान भी तुलसी जी से अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते रहें, फिर इस धागे को तुलसी के पौधे में बांध दें। मनोकामना पूरी होने के बाद इस धागे को निकालकर जल में प्रवाहित कर दें।

तुलसी के सामने दीपक जलाएं
देवउठनी एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाना बेहद शुभ माना गया है, अगर आप इस दिन गाय के घी या तिल के तेल का दीपक तुलसी के पास जलाकर घर की समृद्धि की कामना करती हैं, तो आपको जीवन में धन और सुख का आशीर्वाद मिलता है। दीपक जलाते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

तुलसी के पौधे में लाल चुनरी चढ़ाएं
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को लाल चुनरी ओढ़ाना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाता है, जिसमें तुलसी का विवाह शालिग्राम (विष्णु स्वरूप) से होता है, अगर आप इस दिन तुलसी को लाल चुनरी, बिंदी और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाकर सजाती हैं, तो यह माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक आसान तरीका है। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है, वैवाहिक जीवन में मिठास आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। अगर आप शादीशुदा हैं, तो इस उपाय से दांपत्य जीवन में स्थिरता आती है। अविवाहित लड़कियों के लिए यह उपाय शुभ विवाह के योग बनाता है।

कुछ बातें ध्यान देने योग्य
देवउठनी एकादशी के दिन सुबह तुलसी-पौधे के सामने स्नान कर साफ कपड़े पहनें। तुलसी के चारों ओर हल्की सफाई करें, गमला नीचे रखें और वातावरण शांत रखें। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और “ॐ तुलस्यै नमः”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का पाठ करें।

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