
डिजिटल डेस्क। गणपति उत्सव शुरु हो चुका है। चारों तरफ भव्य पंडाल सज चुका है। बप्पा के भक्त खूब जोर शोर से उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं और भक्ती के रंग में डूबे हुए हैं। अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले इस त्यौहार के बाद बप्पा की विदाई की जाएगी। लेकिन हर भक्त के मन में एक सवाल होता है कि विदाई के बाद गणेश जी को चढ़ने वाला नारियल, कलश जल और दुर्वा जैसी पूजन सामग्री का क्या करना चाहिए। आइए जानते हैं कि शास्त्र इसके बारे में क्या कहते हैं।
प्रसाद के रुप में बांटे नारियल
विसर्जन के समय जो नारियल गणपति जी को अर्पित किया जाता है, उसे विसर्जन के बाद घर में प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए। इसे परिवार क बीच साझा करना शुभ माना जाता है। इससे घर में संपन्नता और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
तुलसी में चढ़ाए जल
पूजन में रखा हुआ कलश बहुत पवित्र माना जाता है। इस जल को Tulsi या पीपल के पेड़ की जड़ों में अर्पित करें या घर के मंदिर/आंगन में छिड़क दें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
दुर्वा (घास) को लेकर करें ये उपाय
गणपति जी को अर्पित दुर्वा बहुत पवित्र मानी जाती है। विसर्जन के बाद इसे किसी पवित्र नदी, तालाब या पीपल के पेड़ की जड़ में छोड़ देना चाहिए। चाहें तो कुछ दुर्वा सुखाकर अपने पूजा स्थान में रख लें, यह संकट निवारण और बुरी नजर से बचाने वाला उपाय माना जाता है।
गणपति विसर्जन के बाद इन बातों का रखें ध्यान
- विसर्जन से पहले आरती, मंत्रोच्चार और भजन अवश्य करें।
- गणपति जी को विदा करते समय उनसे प्रार्थना करें कि-“जल्दी वापस आने का वचन दें, घर-परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखें”।
- अगर नारियल, कलश जल और दुर्वा को इस तरह से श्रद्धा और नियमों के अनुसार रखा जाए तो घर-परिवार पर सालभर गणपति बप्पा की कृपा, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
- विसर्जन के समय शोर-शराबा और नशा न करें, यह अशुभ माना जाता है। कोशिश करें कि इको-फ्रेंडली विसर्जन ही करें ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो।



